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हेपेटाइटिस-बी खतà¥à¤® करने में कारगर है कालमेघ पौधा: डॉ. हरबंस
लीवर में सूजन होने की वजह से हेपेटाइटिस-बी की बीमारी होने से लोग मौत के मà¥à¤‚ह में चले जाते हैं। इसका कारगर इलाज कालमेघ पौधे के पाउडर है। सिरà¥à¤« दो महीने तक इसके नियमित सेवन से ही हेपेटाइटिस-बी का खतरा समापà¥à¤¤ होने लगता है। यह दावा सेंटà¥à¤°à¤² आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ रिसरà¥à¤š इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट फॉर रेसà¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ डिसà¥à¤‘रà¥à¤¡à¤° पटियाला के डॉ. हरबंस सिंह ने किया है, वह कालमेघ पाैधे पर शोध करने के बाद इस नतीजे पर पहà¥à¤‚चे हैं। विशà¥à¤µ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संगठन की ओर से जारी रिपोरà¥à¤Ÿ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤°, हेपेटाइटिस-बी के 68% रोगियों को लीवर सिरोसिस और 80% रोगियों को लीवर कैंसर हो जाता है। विशà¥à¤µ का पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• तीसरा वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ à¤à¤¡à¥à¤¸ या हेपेटाइटिस-बी के पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¤•à¥à¤· संपरà¥à¤• में है। इससे लीवर कैंसर का खतरा सबसे अधिक होता है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में करीब चार करोड़ लोग हेपेटाइटिस-बी से पीड़ित हैं। 40% मरीज 30 साल के अंदर के हैं।
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में ‘आसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤‚टीजन’ से इसकी जांच होती है, à¤à¤¾à¤°à¤¤ में यह इलाज आम लोगों की पहà¥à¤‚च से बाहर
हेपेटाइटिस-बी रोग होने की यह वजह
हेपेटाइटिस-बी à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ वायरस है, जो à¤à¤• वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ से दूसरे में पहà¥à¤‚चता है। यह यौन संबंधों से फैलता है। इसके अलावा सीमन, लार, पसीना, इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ सà¥à¤‡à¤¯à¥‹à¤‚, घाव, चोट, रेजर और टूथबà¥à¤°à¤¶ से फैलता है। यह à¤à¤¡à¥à¤¸ से 50 से 100 गà¥à¤¨à¤¾ अधिक इनà¥à¤«à¥‡à¤•à¥à¤Ÿà¥‡à¤¡ होता है।
पà¥à¤°à¤¯à¥‹à¤—शाला परीकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में ‘आसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‡à¤²à¤¿à¤¯à¤¾ à¤à¤‚टीजन’ से इसकी जांच होती है। जो बहà¥à¤¤ महंगी है। à¤à¤¾à¤°à¤¤ में इतना महंगा परीकà¥à¤·à¤£ अधिकांश रोगियों की पहà¥à¤‚च से बाहर है। यह आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦à¤¿à¤• औषधियों, à¤à¤‚टी वायरस और पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ के साथ-साथ लीवर के लिठअतà¥à¤¯à¤‚त उपयोगी सिदà¥à¤§ हो रही हैं। यह तथà¥à¤¯ सेंटà¥à¤°à¤² आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ रिसरà¥à¤š इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट फॉर रेसà¥à¤ªà¤¿à¤°à¥‡à¤Ÿà¤°à¥€ डिसà¥à¤‘रà¥à¤¡à¤° के डॉ. हरबंस सिंह के शोध में देखने को मिला है। डॉ. सिंह ने शोध अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨ दो वरà¥à¤—ों पर किया। पहले चरण में 58 हेपेटाइटिस-बी के पीलिया से पीड़ित रोगियों को लिया गया, जिनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कालमेघ दो महीने तक दिया गया। परिणाम का आंकलन लाकà¥à¤·à¤£à¤¿à¤• व जैव रासायनिक परीकà¥à¤·à¤£ के आधार पर किया गया। इन रोगियों को à¤à¥‚ख न लगना, थकान, पीलिया, वजन में कमी तथा लीवर वृदà¥à¤§à¤¿ जैसे लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में 75 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤ से अधिक लाठमिला। लीवर फंकà¥à¤¶à¤¨ टेसà¥à¤Ÿ जैसे à¤à¤¸à¤œà¥€à¤ªà¥€à¤Ÿà¥€ तथा à¤à¤²à¥à¤•ेलाइन फासà¥à¤«à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤œ में काफी जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ सà¥à¤§à¤¾à¤° लगà¤à¤— डेढ़ माह में देखने को मिला।कालमेघ से अनà¥à¤¯ कई तरह के रोग à¤à¥€ होते हैं दूरसेंटà¥à¤°à¤² आयà¥à¤°à¥à¤µà¥‡à¤¦ रिसरà¥à¤š इंसà¥à¤Ÿà¥€à¤Ÿà¥à¤¯à¥‚ट, पटियाला के डॉ. हरबंस सिंह ने बताया कि कालमेघ à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ जà¥à¥œà¥€ बूटी है, जिसका सेवन करने से अनà¥à¤¯ कई तरह के रोग दूर हो सकते हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कहा कि यह पौधे पंजाब में बड़ी आसानी से उपलबà¥à¤§ हो जाता है। इस पौधे का चूरà¥à¤£ पंसारी की दà¥à¤•ान पर आम ही मिल जाता है और यह जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ महंगी जड़ी बूटी नहीं है। इस लिठइससे इलाज करना आसान है।
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